Deep Dive
नाउन क्या है और इसका महत्व
अनुज सर पूरी क्लास की शुरुआत करते हैं और पहले स्पष्ट करते हैं कि यूपी ट्रिपल एससी पेट में इंग्लिश के पांच नंबर ग्रामर, वोकैबलरी और अनसीन पैसेज से आते हैं। वे कहते हैं कि नाउन किसी भी व्यक्ति, वस्तु या स्थान का नाम होता है — ए नेमिंग वर्ड। अंग्रेजी ग्रामर का सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि किसी भी नाउन को एक से अधिक बार दोहराया नहीं जा सकता। यदि आप एक ही सेंटेंस में किसी नाउन को दोबारा लिखें तो वह गलत माना जाता है। इसी समस्या को हल करने के लिए प्रोनाउन का आविष्कार हुआ। नाउन को साथियों हम दो रूपों में देखते हैं — काउंटेबल और अनकाउंटेबल। काउंटेबल नाउन को हम गिन सकते हैं और ये सिंगुलर और प्लूरल दोनों रूपों में आ सकते हैं।
अनकाउंटेबल नाउन के नियम और एरर पैटर्न
अनकाउंटेबल नाउन वे हैं जिन्हें गिना नहीं जा सकता — जैसे पानी, हवा, फर्नीचर, सलाह, सामान। अनुज सर जोर देते हैं कि ये नाउन हमेशा सिंगुलर होते हैं और सिंगुलर वर्ब लेते हैं। इनके साथ 'ए' या 'एन' नहीं लगता क्योंकि ये गिनती योग्य नहीं हैं। न ही इन्हें 'एस' या 'ईएस' जोड़कर प्लूरल बनाया जा सकता है। सिनेरी का उदाहरण देते हुए वे समझाते हैं कि 'द सीनरीज़ ऑफ कश्मीर आर' गलत है — सही है 'द सीनरी ऑफ कश्मीर इज'। वे कहते हैं कि इस तरह के एरर में नाउन को गलत रूप से प्लूरल बनाया जाता है। एक बार यह पॉइंट क्लियर हो जाए तो पूरी ग्रामर की नींव मजबूत हो जाती है।
कन्फ्यूजिंग नाउन — दिखावट और अर्थ में विरोधाभास
अनुज सर अब उन नाउन की बात करते हैं जो दिखने में प्लूरल लगते हैं लेकिन हैं सिंगुलर — जैसे न्यूज़, मैथमेटिक्स, फिजिक्स, एथिक्स। ये शब्द 'एस' से खत्म होते हैं इसलिए भ्रम होता है, लेकिन ये वास्तव में सिंगुलर हैं। इसलिए इनके साथ सिंगुलर वर्ब आती है — 'मैथमेटिक्स इज' न कि 'आर'। फिर वे दूसरी ओर के नाउन बताते हैं जो दिखने में सिंगुलर हैं लेकिन अर्थ में प्लूरल होते हैं — जैसे 'कैटल'। यह एक जानवर का समूह है इसलिए प्लूरल है। इसलिए 'द कैटल आर' सही है। फिर वे उन नाउन की चर्चा करते हैं जो हमेशा प्लूरल होते हैं — जैसे स्पेक्टिकल्स, ट्राउज़र्स, सीज़र्स। इन्हें कभी सिंगुलर नहीं बनाया जा सकता और इनके साथ हमेशा प्लूरल वर्ब आती है।
कंपाउंड नाउन और पॉसेसिव केस का नियम
अनुज सर कंपाउंड नाउन की व्याख्या करते हैं — जब दो नाउन मिलकर एक नाउन बनते हैं। जैसे 'गेस्ट रूम' या 'ब्रदर इन लॉ'। कंपाउंड नाउन में एरर तब आता है जब प्लूरल बनाना होता है। यदि बीच में कोई प्रीपोजीशन हो और दोनों तरफ अलग-अलग शब्द हों, तो पहले शब्द को प्लूरल बनाते हैं — 'ब्रदर्स इन लॉ'। लेकिन यदि दोनों तरफ सेम शब्द हों तो सिंगुलर रखते हैं — 'डोर टू डोर' न कि 'डोर्स टू डोर्स'। पॉसेसिव केस में सजीव (लिविंग) और निर्जीव (नॉन-लिविंग) के बीच फर्क होता है। सजीव के साथ अपॉस्ट्रोफी या 'ऑफ' दोनों चल सकते हैं — 'राम की कार' या 'कार ऑफ राम'। लेकिन निर्जीव के साथ केवल 'ऑफ' का प्रयोग होता है — 'द लेग ऑफ द टेबल' न कि 'टेबल्स लेग'।
प्रोनाउन का परिचय और व्यक्ति का नियम
प्रोनाउन नाउन की जगह लेते हैं ताकि दोहराव न हो। अंग्रेजी में तीन व्यक्ति (पर्सन) हैं — फर्स्ट पर्सन (आई, वी), सेकंड पर्सन (यू), थर्ड पर्सन (ही, शी, इट, दे)। जब तीनों पर्सन एक साथ आएं तो क्रम महत्वपूर्ण है। अच्छे कामों के लिए क्रम २-३-१ होता है यानी 'यू, ही एंड आई'। लेकिन बुरे कामों के लिए क्रम १-२-३ होता है यानी 'आई, यू एंड ही'। अनुज सर कहते हैं कि यह गुड सेंस और बैड सेंस का नियम है। यदि तीनों व्यक्ति प्लूरल हों तब भी यही नियम लागू होता है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण एरर मेकिंग पॉइंट है क्योंकि अक्सर छात्र इसे गलत कर देते हैं।
प्रोनाउन के केस और तुलना में अनुप्रयोग
जब किसी सेंटेंस में दो प्रोनाउन के बीच तुलना हो तो सब्जेक्ट की तुलना सब्जेक्ट से और ऑब्जेक्ट की तुलना ऑब्जेक्ट से होनी चाहिए। अनुज सर का उदाहरण है 'यू आर बेटर देन आई' न कि 'देन मी'। यहां 'यू' सब्जेक्ट है तो तुलना भी सब्जेक्ट 'आई' से होनी चाहिए। प्रोनाउन के साथ केस का नियम भी महत्वपूर्ण है। सब्जेक्ट के लिए सब्जेक्टिव केस (आई, यू, ही, शी, इट, दे) और ऑब्जेक्ट के लिए ऑब्जेक्टिव केस (मी, यू, हिम, हर, इट, देम) होता है। वर्ब के बाद और प्रीपोजीशन के बाद दोनों ऑब्जेक्टिव केस आता है। अनुज सर कहते हैं कि 'विद मी' सही है 'विद आई' नहीं। यह बहुत आम एरर है जो छात्र करते हैं।
इट इज और इट वाज़ के बाद कंप्लीमेंट का नियम
एक विशेष नियम है जब सेंटेंस 'इट इज' या 'इट वाज़' से शुरू हो। इस स्थिति में जो प्रोनाउन आता है वह कंप्लीमेंट की तरह काम करता है और सब्जेक्टिव केस में होना चाहिए। इसलिए 'इट इज मी' गलत है — सही है 'इट इज आई'। इसी तरह 'इट वाज़ हिम' गलत है, सही है 'इट वाज़ ही'। यह नियम अक्सर छात्रों को भ्रम में डालता है क्योंकि वर्ब के बाद आमतौर पर ऑब्जेक्टिव केस आता है, लेकिन 'इट इज' के साथ सब्जेक्टिव केस आता है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और बेहद कीमती नियम है जिसे अनुज सर जोर देकर समझाते हैं।