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From Start to the Endgame | Sahil Adeem

166 min video6 key momentsWatch original
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TL;DR

साहिल अदीम का दावा है कि नूह अलैहिस्सलाम ने 950 साल तब्लीग की और ईसा इब्ने मरियम 2026 साल के हैं — बिगर गेम को समझने की कुंजी।

Key Insights

1

950 साल की तब्लीग — हजरत नूह अल सलाम ने 950 साल तक तब्लीग की — इसका मतलब है कि पहली नस्ल से लेकर 34वीं पीढ़ी तक सब कुछ एक ही समय में चल रहा था, जो समय की हमारी समझ को चुनौती देता है।

2

2026 साल की उम्र — ईसा इब्ने मरियम की उम्र 2026 साल है क्योंकि कुरान के हिसाब से ये साल हमारे कैलेंडर से मेल खाता है — जब वो वापस आएंगे तो यही उनकी सरकारी उम्र होगी।

3

अंटार्कटिका की मिसाल — अंटार्कटिका में भेजे जाने पर इंसान को 15 मिनट में ये समझ आ जाता है कि वह वहां का नहीं है — ये सांकेतिक उदाहरण है कि सहज बोध हमें अपने असली उद्गम की ओर ले जाता है।

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बिगर गेम की परिभाषा — बिगर गेम का मतलब है एक ऐसा सिस्टम जिसे संरक्षित रखना — चाहे वह पृथ्वी का ईकोसिस्टम हो या नैतिक सिस्टम — और इसके लिए हथियार पिघलाने पड़ेंगे।

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कैंसर और अलग आर्क — कैंसर की तरह, जब कोई अपना निजी सिस्टम बनाता है तो बड़े सिस्टम का दुश्मन बन जाता है — यही इंसान की अगर अलग आर्क बना ले तो उसके साथ होता है।

6

पीढ़ियों के लिए दीन — हर पीढ़ी के लिए दीन की अलग-अलग समझ होनी चाहिए क्योंकि उलमा अगर सिर्फ खुद को पढ़ाएं तो आने वाली पीढ़ी बेदीन हो जाएगी।

7

आसमान और अंदर की निशानियां — कुरान ने कहा है कि आसमान को देखो और अपने अंदर देखो — ये दोनों जगह से ईश्वर की निशानियां मिलेंगी क्योंकि इंसान उन दोनों का माध्यम है।

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Deep Dive

अंटार्कटिका में मेमोरी लॉस की मिसाल

साहिल भाई शुरुआत में एक विचारशील उदाहरण देते हैं — अगर आपको अंटार्कटिका में मेमोरी लॉस के साथ भेजा जाए, बिल्कुल बचपन जैसी स्थिति में, तो आप सबसे पहले क्या करेंगे? आप अपने कपड़ों को देखेंगे और सोचेंगे कि ये कहां से बने हैं। कपड़े से आप कारखानों की कल्पना करेंगे, मशीनों की, और फिर इंसानों की। सिर्फ एक कपड़े के टुकड़े से आप अपनी उत्पत्ति को समझने की कोशिश करेंगे। यह सिर्फ तर्क नहीं है — यह इंसान के अंदर की स्वाभाविक जिज्ञासा है। जब अंटार्कटिका की ठंडी हवा आपको लगेगी तो आप समझ जाएंगे कि आप यहां के नहीं हो। ये साधारण अनुभव ही आपको इस्लामाबाद तक ले जाएगा क्योंकि आपका शरीर कह रहा होगा कि तुम कहीं और से हो।

ऊपर देखो और अपने अंदर देखो — कुरान का फार्मूला

कुरान बार-बार एक ही बात कहता है कि आसमान में देखो और अपने अंदर देखो तो तुम्हें अल्लाह की निशानियां नजर आएंगी। साहिल कहते हैं कि ये दोनों चीजें कनेक्ट हैं क्योंकि इंसान इन दोनों का वर्टेक्स है — जहां दोनों रेखाएं मिलती हैं। जब आप अंटार्कटिका में उस तकलीफ को महसूस करते हैं तो वह एक निशानी है कि आप कहीं और से आए हो। आसमान को देखने वाले बिना कुरान पढ़े भी उन्हीं सवालों तक पहुंचेंगे जो कुरान पूछ रहा है। विज्ञान के हर क्षेत्र में जो लोग सच्चाई ढूंढ रहे हैं — चाहे वह बायोलॉजिस्ट हो, एस्ट्रोनमर्स हो, फिजिसिस्ट हो — वे सब अंततः उसी सत्य की तरफ जा रहे हैं जो कुरान बता रहा है। समस्या यह है कि हमारे पास किताब है लेकिन हमने उसे पढ़ा नहीं।

950 साल की तब्लीग — समय की एक अलग समझ

कुरान में लिखा है कि हजरत नूह अल सलाम ने 950 साल तब्लीग की। साहिल पूछते हैं कि 950 साल में अगर पहली नस्ल जिंदा रही तो 34वीं पीढ़ी क्यों नहीं? इसका मतलब है कि सब कुछ एक ही टाइम में चल रहा था। उस समय जीवन काल अलग था — लोग 900-900 साल जीते थे, लड़कियों की शादी 900 साल की उम्र में होती थी। ये हमारे वर्तमान समय की समझ से कुछ और ही कहानी सुना रहा है। जब नूह अल सलाम के साथ 40 लोग नाव में बैठे, तो वे सब उनकी नस्लें थीं लेकिन उस समय के मुताबिक। साहिल कहते हैं कि यह लास्ट चैप्टर फर्स्ट चैप्टर को समझाएगा — जब आप ईसा इब्ने मरियम की कहानी समझोगे तो नूह की कहानी साफ हो जाएगी।

इकोसिस्टम का संरक्षण — बिगर गेम की असली परिभाषा

साहिल कहते हैं कि असली बिगर गेम यह है कि आप एक ऐसा सिस्टम बनाएं जो पूरी इंसानियत को बचाए, सिर्फ अपने परिवार को नहीं। जब नूह अल सलाम जानवरों को नाव में ले गए तो उन्होंने सारे का सारा ईकोसिस्टम बचाया। ईसा इब्ने मरियम वापस आएंगे तो सबसे पहले सारे हथियार पिघला देंगे — टैंक, बम, राइफलें सब। फिर इंसान उन पिघली धातुओं से हल बनाएंगे, कृषि के औजार बनाएंगे। इसका मतलब है कि जब तुम अपना छोटा आर्क बनाते हो — सिर्फ अपने लिए — तो तुम कैंसर बन जाते हो। कैंसर की तरह जो अपना अलग सिस्टम बना लेता है, शरीर के बाकी हिस्सों को नष्ट कर देता है। इसलिए अल्लाह ने कहा है कि अपना सिस्टम मत बनाओ, बड़े सिस्टम के साथ चलो।

दीन की समझ और नई पीढ़ी का भटकना

साहिल का सबसे महत्वपूर्ण तर्क यह है कि मुसलमान बेदीन हो रहे हैं क्योंकि उन्हें सही तरीके से दीन नहीं समझाया जा रहा। अगर एक मौलवी सिर्फ परंपरा सिखाता है तो युवा पीढ़ी को बोझ लगता है। जब एक आइंस्टाइन तरह का इंसान आसमान को देख रहा है और उसे अल्लाह की निशानियां दिख रही हैं, लेकिन हमारे उलमा उसे बताते हैं कि बस मानो और पूछो मत, तो वह दीन से दूर चला जाता है। बड़ी समस्या यह है कि हमारे पास किताब है लेकिन हम उसे सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पा रहे। कुरान जो कह रहा है वह सब कुछ है — वह हर पीढ़ी के सवालों का जवाब देता है। लेकिन हम उसे बंद हुक्मों के रूप में प्रस्तुत करते हैं। साहिल कहते हैं कि अगर कोई गैर-मुस्लिम शोधकर्ता सच में कुरान को समझता है तो वह हमें शर्मिंदा कर देगा क्योंकि हम अपनी किताब को ही नहीं समझते।

ईसा इब्ने मरियम की उम्र और हजरत मुहम्मद का मेराज

साहिल एक बहुत ही दिलचस्प बात कहते हैं कि ईसा इब्ने मरियम की उम्र 2026 साल है। उन्होंने पृथ्वी पर 32 साल (कुछ कहते हैं 40) रहे, फिर आसमान पर चले गए। अगर हम कैलेंडर के हिसाब से देखें तो 2026 साल हुए। जब वे वापस आएंगे तो यही उनकी उम्र होगी — प्लस 32। हजरत मुहम्मद का मेराज भी इसी तरह का एक रहस्यमय मामला है। जब वह सात आसमानों पर गए तो हर आसमान पर अलग-अलग समय बीता। आदम के साथ एक समय, अगले आसमान पर दूसरा समय। सातवें आसमान पर इब्राहिम के साथ अलग समय। सब का मिलाकर कितना हुआ? कुछ कहते हैं कि यह समय उनकी उम्र में जुड़ना चाहिए। साहिल कहते हैं कि अगर मेराज को हकीकत मानो तो समय को भी हकीकत मानना चाहिए। और अगर हकीकत है तो वह उम्र में जुड़ता है।

आलम और आलमीन — कई दुनियाओं की मौजूदगी

कुरान के पहले ही शब्दों में अल्लाह कहता है अलहम्दु लिल्लाहि रब्बुल आलमीन — सब दुनियाओं का रब। साहिल कहते हैं कि इसका मतलब है सिर्फ एक दुनिया नहीं है। चौथी डायमेंशन हो, पांचवीं हो, सातवीं हो, या गोल्डन लॉक ज़ोन के अंदर कोई और ग्रह हो — कहीं न कहीं और आलम (जगत) है। नूह अल सलाम 950 साल तक सिर्फ इस एक दुनिया में तब्लीग नहीं

Takeaways

  • ✓कुरान को सिर्फ लफ़ज़ी तौर पर नहीं बल्कि समझ के साथ पढ़ें — आसमान में देखें और अपने अंदर भी देखें।
  • ✓बिगर गेम समझने के लिए आपको ये जानना ज़रूरी है कि हर नबी एक साथ अलग-अलग आलमों में काम कर रहे हैं।
  • ✓इंसान अगर अपना सिस्टम बना ले तो कैंसर की तरह बड़े सिस्टम को खत्म कर देता है — इकोसिस्टम को बचाना हमारा سب سے بڑا کام ہے۔
  • ✓مسلمانوں کی سب سے بڑی غلط فہمی یہ ہے کہ وہ دین کو مولویوں کی تفریق سے سمجھتے ہیں نہ کہ کتاب سے۔

Key moments

1:30متعدد آلمیں اور نبیوں کا کام

“آلم اور آلمیں کا جو کنیکشن ہے جو آپ نے بتایا کے حضرت نوح علیہ السلام اس وقت صرف اس آلم کو نہیں تمام‌تر آلم”

34:45نوح علیہ السلام کی 950 سال کی تبلیغ

“حضرت نوح علیہ السلام نے 950 سال صرف تبلیغ کی ہے یہ قرآن کی آیت ہے 950 سال تبلیغ کا مطلب صاف ظاہر ہے”

53:00ایسیٰ ابن مریم کی عمر

“ایسیٰ ابن مریم 2026 سال کے ہیں 100 فیصد خدا کی قسم ہے جب وہ آئیں گے کیا پتہ آج آ گئے 2026 سال کے ہی ہوں گے ناں”

34:00ہتھیار پگھلانے کا مطلب

“تمام ٹینک ایٹومک بمس پستول رائفل ٹوما ہاکس مسائل تمام آرمیمنٹس پگھلا دینی ہے ہتھیار پگھلا کر ہل بنانے ہیں”

57:45موجودہ مسلمانوں کا بحران

“ہم مسلمانوں کو کفار کے لیے فتنہ بنا دیا ہے ہمارے لیک اور پرفارمنس دیکھ کر وہ دین کو دھکار دیں”

30:16بڑے سسٹم میں اپنا سسٹم بنانا

“اگر آپ اپنے لیے آرک بنا رہے ہیں تو وہ میری دشمنی کر رہے ہیں آپ کیونکہ آپ روک رہے ہیں آپ کینسر کریٹ کر رہے ہیں”

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