Deep Dive
जर्नल का परिचय और फॉर्मेट
मनीष महाजन सर क्लास 11 की अकाउंट्स की हाफ-ईयरली मैराथॉन शुरू करते हैं और जर्नल से शुरुआत करते हैं क्योंकि यह बुक ऑफ ओरिजिनल एंट्री है। जर्नल का मुख्य पर्पस क्रोनोलॉजिकल डेट-वाइज में सभी ट्रांजैक्शन का कंप्लीट रिकॉर्ड बनाना है। सर समझाते हैं कि जर्नल एंट्री का फॉर्मेट बड़ा सिंपल है — जिन अकाउंट्स को डेबिट करना है वो पहले लिखते हैं, फिर क्रेडिट वाले अकाउंट्स। हर एंट्री के नीचे नरेशन लिखी जाती है जो ट्रांजैक्शन का एक्सप्लेनेशन देती है। सर बताते हैं कि जर्नल को डे बुक भी कहते हैं और इसी से लेजर बनाई जाती है। इस मैराथॉन में सर कवर करेंगे जर्नल, लेजर, ट्रायल बैलेंस, थ्योरेटिकल फ्रेमवर्क, एकाउंटिंग इक्वेशन, सीओजीएस, सब्सिडरी बुक्स, और बीआरएस — यह सब कुछ करीब 6-10 घंटे में खत्म करने की प्लान है।
ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट की एंट्री
सर एक महत्वपूर्ण कांसेप्ट समझाते हैं कि ट्रेड डिस्काउंट और कैश डिस्काउंट अलग-अलग होते हैं। उदाहरण में, हरी ने रिया से 1 लाख का सामान ट्रेड डिस्काउंट पर खरीदा और आधा पैसा कैश में देकर कैश डिस्काउंट ले लिया। सर दिखाते हैं कि पहले लिस्ट प्राइस से ट्रेड डिस्काउंट घटाई जाती है — इससे ट्रांजैक्शन वैल्यू मिलती है। फिर जो कैश पेमेंट होती है सिर्फ उसी पर कैश डिस्काउंट अप्लाई होता है। एंट्री में कैश अकाउंट डेबिट किया जाता है, डिस्काउंट अलाउड रिकॉर्ड किया जाता है, क्रेडिटर को क्रेडिट किया जाता है, और परचेस अकाउंट को क्रेडिट किया जाता है। कई बच्चों को यह समझ नहीं आता कि क्यों 80% और 20% में बांटा जा रहा है, पर सर पेशेंली समझाते हैं कि यह सिर्फ कैलकुलेशन है।
जीएसटी की एंट्री और इनपुट-आउटपुट का कांसेप्ट
सर जीएसटी के साथ जर्नल एंट्री को विस्तार से समझाते हैं। इंट्रास्ट ट्रांजैक्शन (सेम स्टेट) में सीजीएसटी और एसजीएसटी अलग-अलग 6% होते हैं, जबकि इंटरस्ट ट्रांजैक्शन (डिफरेंट स्टेट) में 18% आईजीएसटी होता है। परचेस पर जीएसटी इनपुट होता है (हमारी एसेट) और सेल पर आउटपुट होता है (हमारी लायबिलिटी)। सर एक क्वेश्चन करवाते हैं जहां साहिल लिमिटेड ने आकांक्षा से सामान खरीदा और परचेस अकाउंट डेबिट किया जाता है, साथ ही सीजीएसटी और एसजीएसटी इनपुट भी डेबिट होते हैं। जब नपुर स्टोर को सामान बेचा तो सेल अकाउंट क्रेडिट किया, और आउटपुट जीएसटी दोनों क्रेडिट किए। यह कांसेप्ट बहुत सारे बच्चों को कन्फ्यूज करता है पर सर धीरे-धीरे समझा देते हैं।
जीएसटी रिवर्सल और नो-सेल सिचुएशंस
एक बहुत महत्वपूर्ण कांसेप्ट है जीएसटी रिवर्सल। सर समझाते हैं कि जब सामान बेचा नहीं जाता — जैसे ड्रॉइंग्स (मालिक निजी इस्तेमाल के लिए सामान निकालता है), चैरिटी, सैंपल, लॉस, या परचेस रिटर्न — तब इनपुट जीएसटी को रिवर्स करना पड़ता है। कारण यह है कि सरकार कहती है अगर तूने सामान बेचा ही नहीं तो हम तुम्हारे को इनपुट टैक्स वापस नहीं दे सकते। एक डायनामो नाम का स्टूडेंट सही जवाब देता है कि ड्रॉइंग्स में जीएसटी भी रिवर्स करना पड़ेगा। सर दिखाते हैं कि ड्रॉइंग्स 4000 की थी पर जीएसटी रिवर्स होने से 4400 + होगी। यही लॉजिक परचेस रिटर्न, चैरिटी, और सैंपल में भी लागू होता है। इस कांसेप्ट को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि यह पेपर में आएगा।
ओपनिंग एंट्री और अन्य स्पेशल एंट्रीज
सर ओपनिंग एंट्री को भी विस्तार से समझाते हैं जहां सभी एसेट्स को डेबिट किया जाता है, सभी लायबिलिटीज को क्रेडिट किया जाता है, और डिफरेंस कैपिटल होता है। एक एक्सेंपल में स्टॉक 30000, डेटर्स 20000, कैश 25000, बैंक 25000, मशीन 5000 थे, जबकि बैंक लोन 3000 और क्रेडिटर्स 20000 थे। डिफरेंस 1 लाख कैपिटल हुआ। फिर सर स्पेशल एंट्रीज दिखाते हैं — जब रेंट पे करते हो तो रेंट अकाउंट डेबिट, जब सैलरी पेएबल है तो सैलरी अकाउंट डेबिट और सैलरी पेएबल क्रेडिट। सर बताते हैं कि इंटरेस्ट ऑन कैपिटल के लिए आईओसी अकाउंट डेबिट होता है और कैपिटल क्रेडिट होता है। सिमिलरली इंटरेस्ट ऑन ड्रॉइंग्स के लिए ड्रॉइंग्स डेबिट और आईओडी क्रेडिट होता है। ये सभी कांसेप्ट्स एग्जाम में बार-बार आते हैं।
कॉम्प्लेक्स ट्रांजैक्शंस और प्रैक्टिस क्वेश्चंस
सर कई कॉम्प्लेक्स क्वेश्चंस भी करवाते हैं जहां एक ट्रांजैक्शन में बहुत सारी डिटेल्स होती हैं। उदाहरण में सोनल को सामान बेचा गया जिसमें लिस्ट प्राइस, ट्रेड डिस्काउंट, पार्शियल कैश पेमेंट, कैश डिस्काउंट, और जीएसटी सब कुछ था। सर दिखाते हैं कि कैसे 60% पेमेंट के लिए कैश डिस्काउंट लागू होता है और 40% के लिए नहीं। एंट्री में सोनल अकाउंट को डेबिट किया जाता है, कैश को डेबिट किया जाता है, डिस्काउंट अलाउड को डेबिट किया जाता है, सेल को क्रेडिट किया जाता है, और सीजीएसटी और एसजीएसटी को क्रेडिट किया जाता है। बहुत सारे बच्चों को यह कैलकुलेशन कन्फ्यूजिंग लगती है पर सर पेशेंटली हर स्टेप को समझाते हैं। सर बोलते हैं कि अगर यह एंट्री समझ नहीं आई तो नाम बदल देना क