Deep Dive
इलेक्शन टॉपिक का बेसिक फाउंडेशन
यह वीडियो SSC CGL के लिए अर्थमैटिक के सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स को कवर करता है, जिनमें बच्चों को सबसे ज्यादा गलतियां होती हैं। इलेक्शन वाले सवालों में पहली चीज को समझना है कि टोटल वोट्स का क्या मतलब है — यह वोटर लिस्ट में जिनका नाम है सब होते हैं, चाहे वो वोट दें या न दें। फिर वोट कास्ट का मतलब जितने लोग वोट डालने गए, और इनवैलिड वोट्स वो होते हैं जो वैलिड नहीं हैं। वैलिड वोट्स ही दरअसल कैंडिडेट्स को मिलते हैं। इलेक्शन सवालों में दो मेथड्स हैं: जब कैंडिडेट को वैलिड वोट से रिलेट करते हैं तो सक्सेसिव मेथड लगाते हैं, और जब टोटल वोट से रिलेट करते हैं तो ट्री मेथड लगाते हैं। यह बेसिक समझ सब कुछ आसान बना देती है।
सक्सेसिव मेथड और ट्री मेथड का प्रैक्टिकल अनुप्रयोग
सक्सेसिव मेथड में आप पहले देखते हो कि टोटल वोट्स में से कितने लोगों ने वोट डाला, फिर इसमें से कितने वैलिड हैं, और फिर इन वैलिड वोट्स में से किसको कितना मिला। जैसे अगर 10% लोगों ने वोट नहीं डाला और 15% वोट इनवैलिड हो गए, तो आपको सीधे यह निकालना है कि 75,000 टोटल वोट्स में से 90% लोगों ने वोट डाला (67,500), और इसमें से 85% वैलिड हैं (57,375)। अब अगर कैंडिडेट P को वैलिड वोट्स का 78% मिला है, तो Q को 22% मिलेगा। ट्री मेथड में सीधा 100% को तोड़ते हैं, जैसे 100% में से 15% नहीं डाले, 69% किसी को मिले, तो बचा 16% जिसमें इनवैलिड भी है और दूसरा कैंडिडेट भी। दोनों मेथड्स एक ही आंसर देते हैं, बस सोचने का तरीका अलग है।
प्रॉफिट-लॉस में विनर-लूजर डिफरेंस निकालना
प्रॉफिट-लॉस में जब विनर और लूजर के बीच का डिफरेंस दिया जाता है, तो एक सिंपल ट्रिक है। अगर विनर को 60% मिला है तो लूजर को 40% मिलेगा, और डिफरेंस 20% होगा। लेकिन अगर मेमोरी में यह न बैठे तो आप 50 को मिड पॉइंट मानो — अगर कोई पर्सेंटेज 60 है तो 50 से उसकी दूरी 10 है, फिर इसका डबल कर दो (20) और आपका डिफरेंस निकल गया। यह ट्रिक सभी केसेस में काम करती है। जैसे अगर विनर को 56% मिला तो 50 से दूरी 6 है, डबल करो 12 — यही डिफरेंस है। यह गणित को तेज करता है और परीक्षा में समय बचाता है।
सेम सेलिंग प्राइस और डिसऑनेस्ट शॉपकीपर
जब एक शॉपकीपर कहता है कि मैं किसी सामान को इतने रुपए में बेचता हूं तो मुझे प्रॉफिट होता है, लेकिन अगर उसे इतने में बेचूं तो मुझे लॉस होता है, तो यह वजन या मात्रा में फर्क है। डिसऑनेस्ट शॉपकीपर परिस्थिति में शॉपकीपर कम वजन देता है लेकिन सेम सेलिंग प्राइस रखता है। उदाहरण के लिए, अगर 12 पेन का दाम 240 रुपए है लेकिन वह 6 पेन का कॉस्ट प्राइस लॉस के बराबर लॉस दे रहा है, तो 12 CP - 6 CP = 6 CP लॉस हो रहा है, और यह 12 SP के बराबर है। इससे CP और SP का अनुपात आसानी से निकल आता है। ये सवाल सिर्फ अनुपात निकालने के बाद परीक्षा में आसान हो जाते हैं।
प्रॉफिट और लॉस दोनों दिए गए सवाल
जब सवाल कहता है कि अगर आप किसी आइटम को 480 रुपए में बेचते हो तो आपको X% लॉस होता है, लेकिन अगर इसे 720 रुपए में बेचते हो तो Y% प्रॉफिट होता है, तो आप दोनों सेलिंग प्राइसेस के बीच का अंतर निकालते हो। 720 - 480 = 240 है, और यह डिफरेंस (X% + Y%) के बराबर है क्योंकि एक तरफ लॉस है दूसरे तरफ प्रॉफिट। अब अगर आपको दिया है कि X = 20% और Y = 10%, तो गैप 30% है और इसकी वैल्यू 240 है। इससे 1% की वैल्यू 8 निकलती है, और CP (जो 100%) की वैल्यू 800 हो जाती है। यह एक बहुत ही पावरफुल कांसेप्ट है जो सभी तरह के प्रॉफिट-लॉस सवालों को खोल देता है।
इनवैलिड वोट्स का असर और ट्री मेथड में हिसाब
जब ट्री मेथड से काम करते हो तो 100% को पहले यह समझो कि इसमें से क्या-क्या कम हो रहा है। अगर 15% लोगों ने वोट नहीं डाला, 20% वोट इनवैलिड हो गए, और विनर को 69% मिला, तो बचा 16% जिसमें इनवैलिड वोट्स भी हैं और लूजर को मिले वोट्स भी हैं। अब अगर उस 20% इनवैलिड का 90% भाग लूजर को मिल जाता है तो उसे 18% मिल जाता है, और वह कुल 53% पे पहुंच जाता है। इस तरह विनर के 45% का मुकाबला लूजर के 53% के साथ हो जाता है और लूजर जीत जाता है 8% से। यह समझना महत्वपूर्ण है कि इनवैलिड वोट्स परिणाम को कैसे बदल सकते हैं।