Deep Dive
दांपत्य समस्या और भूतिया समाधान
महिला अपनी भयानक दांपत्य स्थिति से जूझ रही है — शादी के दस दिन बाद ही तनाव शुरू हो गया। ज्योतिषी घर का विस्तृत विश्लेषण करता है: पीपल का पेड़ लगा है जिससे कैल्शियम और विटामिन डी की कमी हुई है। लेकिन असली समस्या ब्राह्मण की भटकती आत्मा है जो घर में रहती है। ज्योतिषी कहते हैं कि यह आत्मा दांपत्य जीवन को बर्बाद कर रही है। समाधान के लिए तांबे के चार टुकड़े लेने चाहिए — दो को रविवार और मंगलवार को नदी में बहाना है, और दो को लाल कपड़े में बांधकर अलमारी में अलग-अलग रखना है। यह प्रयोग करने से घर में शांति आएगी और दांपत्य जीवन पर महिला का नियंत्रण रहेगा।
व्यक्तित्व परिवर्तन और नौकरी की सलाह
ज्योतिषी महिला को कड़ा संदेश देते हैं: उसका अत्यधिक भावुक और दयालु स्वभाव ही उसकी परेशानियों की जड़ है। वो सीधे पेड़ की तरह है जो जंगल में काटे जाते हैं, नीम की तरह नहीं जिसका कोई उपयोग नहीं। मीठे फल हमेशा चाकू में रहते हैं — इसी तरह दयालु लोगों का भी हाल होता है। महिला के शिक्षण की योग्यता है लेकिन सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। इसके बजाय उसे तीन रत्न (माणिक, मूंगा, पीला पुखराज) का लॉकेट बनवाना चाहिए और उसे जीवन भर पहनना चाहिए। और सबसे महत्वपूर्ण — प्राइवेट क्षेत्र में मशीन-संबंधी काम करना चाहिए। सिलाई मशीन, कारखाने या मेडिकल स्टोर में काम करके वह करोड़ों रुपए कमा सकती है।
पितृ मुक्ति और अमावस्या का शक्तिशाली प्रयोग
महिला अपने पिता की अकाल मृत्यु के बारे में पूछती है। ज्योतिषी कहते हैं कि पहले तो गया जाकर पिंडदान करवाएं, और त्रिपिंडी श्राद्ध करवाएं। लेकिन सबसे कारगर प्रयोग है अमावस्या की तिथि पर हर महीने पीपल के पेड़ को पानी और सरसों के तेल का दीपक चढ़ाना। जब भी मृत व्यक्ति का पूजन हो, वह स्वप्न में आकर बात करता है। एक साल तक यह प्रयोग करने से मृत व्यक्ति स्वप्न में हंसते-मुस्कुराते आशीर्वाद देता है। ज्योतिषी अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हैं: उन्होंने 1993 में अपने पिता के लिए यह प्रयोग किया था। जब उनके पिता ने स्वप्न में नाराजगी दिखाई, उसी हफ्ते उन्हें 35 लाख का नुकसान हुआ। लेकिन 2003 में पिता का आशीर्वाद मिलते ही आस्था चैनल में ज्योतिष प्रोग्राम के लिए चुन लिए गए। इस प्रयोग की गारंटी है कि आशीर्वाद मिलने के 10 दिन में कुछ बड़ा अच्छा काम हो जाता है।
त्रयोदशी के भोजन को प्रसाद में बदलने का रहस्य
ज्योतिषी एक अंतिम और महत्वपूर्ण रहस्य साझा करते हैं जो मृत्यु के 13 दिन बाद लागू होता है। त्रयोदशी पर जब मृत्यु भोज बनता है, तो उस भोजन को तैयार करने के बाद घर में जो पूजन होती है, उसमें गीता के 15वें अध्याय का ब्राह्मण द्वारा पाठ करवा दिया जाए। इस एक कदम से पूरा भोजन साधारण प्रसाद में बदल जाता है। यह प्रयोग मृत व्यक्ति की आत्मा को मुक्ति दिलाने और सात पीढ़ियों तक पारिवारिक समृद्धि सुनिश्चित करने का माध्यम है। ज्योतिषी बारंबार जोर देते हैं कि उनके पास कम प्रयोग हैं लेकिन सभी कारगर हैं — वे भगवान की कृपा से काम करते हैं।